1 year agoये चाहती है व्यस्तता
ये दिल-दिमाग हमें कहता है कि:
तू रख मुझे व्यस्त इस दुनिया की व्यस्तता मैं,
तुझे मैं दुनिया की नई चीजों का सैर कराऊंगा,
तू अगर उड़ना चाहेगा तो मैं यूं पंख-सा बन जाऊंगा...
मगर तू रुकना न जिंदगी की कढ़नायों से,
नहीं तो मैं ही तुम्हारे उलझनों का पहाड़ी यूं बनाऊंगा कि,
बिखरोगे यूं टूट के, खुदके ही टुकड़े न सिमट पाओगे...
लेकिन तू अगर बढ़ गया सिमट कर,
तो तुम्हें मैं दुनिया कितनी खूबसूरत है,
ये तुम्हें मैं दिखलायूंगा...
Updated 5 months ago
ये दिल-दिमाग हमें कहता है कि:
तू रख मुझे व्यस्त इस दुनिया की व्यस्तता मैं,
तुझे मैं दुनिया की नई चीजों का सैर कराऊंगा,
तू अगर उड़ना चाहेगा तो मैं यूं पंख-सा बन जाऊंगा...
मगर तू रुकना न जिंदगी की कढ़नायों से,
नहीं तो मैं ही तुम्हारे उलझनों का पहाड़ी यूं बनाऊंगा कि,
बिखरोगे यूं टूट के, खुदके ही टुकड़े न सिमट पाओगे...
लेकिन तू अगर बढ़ गया सिमट कर,
तो तुम्हें मैं दुनिया कितनी खूबसूरत है,
ये तुम्हें मैं दिखलायूंगा...
Updated 5 months ago