1 year ago
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मैं सोचूँ क्या बितती होगी उनपर जो रिश्तों के रास्ते में टूट के यूं बिखरें होंगें,
क्या हस्र हुआ होगा उनका जिन्हें इन रास्तों पर आगे बढ़ के मंजिल के लिए ठोकर खाएं होंगें,
कैसे संभाले होंगें खुदको जो संभालने वाले से यूं बिछड़े होंगें,
कैसे मुस्कराहट दिखना सीखे होंगें जो अंदर से पूरा टूट चुके होंगें,
क्या-क्या यूं छिपाए होंगें "सब कुछ ठीक है" ये कहने से पहले,
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Updated 6 months ago